ये जो बाईं तरफ़ सीने का
ये जो बायीं तरफ़ सीने के मेरे अगला हिस्सा है यहीँ पे हाथ रख दो तुम यहीँ से दर्द उठता है अरे ओ भूलने वाले तुझे कैसे भुलाऊँ मैं मेरा तो हाफ़िज़ा ऐसा है सबकुछ याद रहता है मुक़र्रर वक़्त है सबका कभी ये भूल मत जाना के जिसका वक़्त हो जाये उसे फिर लौट जाना है बदन की ख़्वाहिशें नापाक कर देती हैं जिस्मों को मुहब्बत तो इबादत है इबादत कौन करता है किसी से पूछ लो आकर यक़ी ऐसे नहीं होगा तुम्हारे बाद क्या हमको किसी ने हँसते देखा है भरोसा उठ गया मश्कूर अब दुनिया के लोगों से ख़ुदा की ज़ात पर लेकिन हमें पूरा भरोसा है