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Ghazal

 ज़िन्दगी दर्द के साये में बसर करता रहा उम्र भर मैं तेरी यादों का सफ़र करता रहा दोस्त अहबाब अकारिब थे सभी अपने थे कौन था फिर जो इधर की है उधर करता रहा मश्कूर ममनून